जिस वर्ष में रोहिणों के आग्नेय कोण में चन्द्रमा स्थित हो, उस वर्ष में बहुत उपद्रव,
नैर्श्वत्य कोण में चन्द्रमा स्थित हो तो अति वृष्टि आदि इंतियों से पीड़ित होकर पान्य का
नारा, वायव्य कोण में स्थित चन्द्र हो तो मध्यम धान्य और ईशान कोण में स्थित चन्द्र हो
तो उस वर्ष धान्यों के मूल्य में अल्पता, सुन्दर वृष्टि भादि बहुत गुण होते हैं।
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