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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 32
अनुगच्छति पृष्ठतः शशी यदि कामी वनितामिव प्रियाम् । मकरध्वजवाणखेदिताः प्रमदानां वशगास्तदा नराः ॥
जैसे प्रिया ली के पीछे कामी पुरुष गमन करता है, उसी तरह यदि रोहिणी के पीछे चन्द्र गमन करे तो काम के बाण से खेदित होकर मनुष्यगण स्त्री के यश में हो जाते हैं।
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