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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 31
उदितं यदि शीतदीधितिं प्रथमं पृष्ठत एति रोहिणी। शुभमेव तदा स्मरातुराः प्रमदाः कामवशेन संस्थिताः ॥
पहले चन्द्र का उदय होकर पश्चात् चन्द्र के पश्चिम दिशा में रोहिणी उदित होकर गमन करे तो लोगों में अनेक प्रकार के शुभ होते हैं तथा कामातुर स्रोगण पति के वश में हो जाती हैं।
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