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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 30
रोहिणीशकटमध्यसंस्थिते चन्द्रमस्यशरणीकृता जनाः । क्वापि यान्ति शिशुयाचिताशनाः सूर्यतप्तपिठराम्बुपायिनः ॥
यदि रोहिणी शकट (छः तारा होने के कारण रोहिणी शकट कहते हैं) के मध्य स्थित होकर चन्द्रमा गमन करे तो आश्रयरहित, बच्चों के लिये भोजन माँगते हुये, सूर्य किरण से अत्यन्त उष्ण जल पीते हुये लोग (प्रजागण) अनिश्चित स्थान पर गमन करते 1
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