मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 3
तानवलोक्य यथावत् प्राजापत्येन्दुसम्प्रयोगार्थान्। अल्पधन्येनाहं तानेवाभ्युद्यतो वक्तुम् ॥
अपने शिष्यों के लिये गर्ग, पराशर, काश्यप और मयासुर ने रोहिणी-चन्द्रसमागम के सम्बन्ध में जो कहा है, उसको घोड़े पदों के द्वारा कहने के लिये में उद्यत हुआ हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें