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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 27
अन्यैश्च कुम्भैर्नृपनामचिह्नर्देशाङ्कितै श्चाप्यपरैस्तथैव । भग्नैः सुतैर्च्यूनजलैः सुपूर्णैर्भाग्यानि वाच्यानि यथानुरूपम् ॥
रोहियों योग के समय दृष्टि होने पर उत्तर आदि चार दिशाओं में प्रदक्षिण क्रम से उत्तर आदि दिशाओं में स्थिराना, देश और ब्राह्मण आदि चार वर्षों का नाम अङ्कित करके पूर्ववत् चार धड़ों का स्थापन करे। बाद में जिस दिशा का महा नष्ट हो जाप, उस दिख के राजा, देश और बगों का नाम, जिस दिशा के पड़ा से सब जाल बह जाय उस दिसा के राजा अदियों में उपद्रव; जिस दिशा के पड़ा में थोड़ा बल शेष रहे उस दिशा के राजा आदियों को मध्यम फल और जिस दिशा का पड़ा जल से पूर्ण हो जाय उस दिश के राजा आदियों को अति शुभ फल होड़ा है।
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