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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 26
नामाङ्कितैस्तैरुदगादिकुम्भैः प्रदक्षिणं श्रावणमासपूर्वैः । पूर्णः स मासः सलिलस्य दाता सुतैरवृष्टिः परिकल्प्यमूनैः ॥
पूर्णः स मासः सलिलस्य दाता सुतैरवृष्टिः परिकल्प्यमूनैः ॥२६॥ रोहिणी योग के दिन वृष्टि होने पर उत्तर आदि चारों दिशाओं में प्रदक्षिण क्रम से आषण आदि चार मासों का नाम अङ्कित करके चार पड़ों का स्थापन करे। जिस मास का महा जल से पूर्ण हो जाय, यह मास फल देने वाला, पड़े से बिलकुल जल निकल जाय तो अवृष्टि और घोड़ा जल हो तो अपनी बुद्धि से तारतम्य करके सृष्टि की कल्पना करनी चाहिये। जैसे आधे में आपा, चौथाई में चौथाई इत्यादि वृष्टि कहनी चाहिये ।
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