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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 25
उल्कानिपातास्तडितो ऽ शनिश्च दिग्दाहनिर्घातमहीप्रकम्पाः । नादा मृगाणां सपतत्त्रिणाश्च ग्राह्या यथैवाम्बुधरास्तथैव ॥
रोहिणी योग के समय दिशाओं के अनुसार मेघों के फल (पूर्वोद्धवैः सस्यनिष्पत्ति- रित्यादि पद्योक्त फल) की तरह दिशाओं के अनुसार उल्कापात, विद्युत्, दिग्दांह, आकाश में शब्द, भूकम्प, पक्षी और वन-जन्तुओं के शब्द का फल कहना चाहिये।
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