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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 23
पूर्वोद्भूतैः सस्यनिष्पत्तिरब्दैराग्नेयाशासम्भवैरग्निकोपः । याम्ये सस्यं क्षीयते नैऋत्तेऽर्द्ध पश्चाज्जातैः शोभना वृष्टिरब्दैः ॥
पूर्व दिशा में उत्पन्न मेपों से धान्य की उत्तम निष्पत्ति, आग्नेय कोण में उत्पन्न मेघों से अग्नि का भय, दक्षिण दिशा में उत्पन्न मेघों से धान्य का नाश, नैर्ऋत्य कोण में उत्पन्न मेथों से धान्य को आधी निष्पत्ति
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