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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 21
रूक्षैरल्पैर्मारुताक्षिप्तदेहैरुष्ट्र ध्वाङ्क्षप्रेतशाखामृगाभैः 1 अन्येषां वा निन्दितानां स्वरूपैर्मूकै चाब्दैनों शिवं नापि वृष्टिः ॥
रूस, अल्प, वायु से प्रेरित, ऊँट, कौआ, मुर्दा, बानर या अन्य निन्दित जोवों (कुत्ता, बिल्ली, राक्षस आदि) की तरह कान्ति वाले और शब्दरहित मेघ अशुभ और अवृष्टि करने बाले होते हैं।
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