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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 2
सुरनिलयशिखरिशिखरे बृहस्पतिर्नारदाय यानाह गर्गपराशरकाश्यपमयाक्ष यान् शिष्यसद्धेभ्यः ॥
विद्याधारियों के गौत से उत्पत्र मधुर शब्दों से पुत और सुमेरु पर्वत पर स्थित उपवन में नारद के लिए बृहस्पति तथा अपने शिष्यों के लिये गर्ग,
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