मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 18
सन्थ्यानुरक्ते नभसि स्थितानामिन्दीवरश्यामरुचां घनानाम् । वृन्दानि पीताम्बरवेष्टितस्य कान्तिं हरेश्चोरयतां यदा वा ॥
जिस आकाश में सन्ध्याकालिक राग से रंगे, नील कमल के समान मानो पीताम्बर पहने हुए विष्णु भगवान् को कान्ति को चुराने वाले मेघ हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें