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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 16
अथवाञ्जनशैलशिलानिचयप्रतिरूपधरैः स्थगितं गगनम् । हिममौक्तिकशङ्खशशाङ्ककरद्युतिहारिभिरम्बुधरैरथवा ॥
अथवा अञ्जन पर्वत के काले पत्थरों के समान मेघों से युत या हिम, मोती, शंख और चन्द्र-किरण की कान्ति को हरण करने वाले मेपों (चेत वर्ण के पंपों ) से युत आवारा रोहिणी योग के समय में शुभ होता है।
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