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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 13
क्वचिदसितसितैः सितैः क्वचिच्च क्वचिदसितैर्भुजगैरिवाम्बुवाहैः । वलितजठरपृष्ठमात्रदृश्यैः स्फुरिततडिद्रसनैर्वृतं विशालैः ॥
पेट की तरफ से कुण्डलाकार होने के कारण पृष्ठमात्र दिखाई देने वाले सर्पों की तरह; अतः कहीं पर कृष्ण-चेत, कहीं-कहीं पर केवल घेत, कहीं पर केवल कृष्ण विशाल और चमकती हुई बिजली के समान जीभ वाले
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