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बृहत्संहिता • अध्याय 24 • श्लोक 11
वृत्ते तु योगेऽङ्कुरितानि यानि सन्तीह बीजानि धृतानि कुम्भे । येषां तु योंऽशोऽङ्कुरितस्तदंशस्तेषां विवृद्धिं समुपैति नान्यः ॥
रोहिणी में स्थित चन्द्र के समय घड़े में दिये हुये बोजों में से जिनके जितने अंश अङ्कुरित हों, उतने की उस वर्ष में वृद्धि होती है।
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