हस्ताप्यसौम्यचित्रापौष्णधनिष्ठासु षोडश द्रोणाः । शतभिषगैन्द्रस्वातिषु चत्वारः | कृत्तिकासु दश ॥
हस्त, पूर्वाषाढ़ा, मृगशिरा, चित्रा, रेवतो या धनिष्ठा नक्षत्र में यदि प्रवर्षणकाल में वृष्टि
हो तो प्रसवकाल में सोलह द्रोण वृष्टि होती है। इसी तरह शतभिषा, ज्येष्ठा और स्वाती में
चार द्रोण; कृत्तिका में दश द्रोण
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