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बृहत्संहिता • अध्याय 23 • श्लोक 2
हस्तविशालं कुण्डकमधिकृत्याम्बुप्रमाणनिर्देशः । पश्चाशत्पलमाढकमनेन मिनुयाज्जलं पतितम् ॥
एक हाथ तुल्य व्यास वाले और एक हाथ गहरे वर्तुलाकार कुण्ड से वृष्टि के जल का मापन करना चाहिये, जल से पूर्ण इस कुण्ड में पचास पल (एक आढ़क) तुल्य जल होता है। पचास पल का एक आदक और चार आढ़क का एक द्रोण होता है।
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