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बृहत्संहिता • अध्याय 23 • श्लोक 1
ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा बीत जाने पर पूर्वाषा र आदि सभी नक्षत्रों में वृष्टि हो तो जल का शुभाशुभ परिमाण कहना चाहिये। अर्थात् वृष्टि हो तो शुभ और अवृष्टि हो तो अशुभ कहना चाहिये ।।
ज्येष्ठमासस्येयं पौर्णमासी ज्यैष्ठी, तस्यां समतीतायामतिक्रान्तायां पूर्वाषाढादिसम्प्रवृष्टेन पूर्वाषाढामादितः कृत्वा सर्वेषु नक्षत्रेषु सम्प्रवृष्टेन प्रवर्षितेन तज्ज्ञैः पण्डितैरम्भसो जलस्य परिमाणं शुभमशुभं वा वाच्यं वक्तव्यम्। वृष्टौ शुभमवृष्टावशुभमिति। तथा च गर्ग:- ज्येष्ठे मूलमतिक्रम्य मासि प्रतिपदग्रतः। वर्षासु वृष्टिज्ञानार्थ निमित्तान्युपलक्षयेत्।
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