ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा बीत जाने पर पूर्वाषा र आदि सभी नक्षत्रों में वृष्टि हो तो जल का शुभाशुभ परिमाण कहना चाहिये। अर्थात् वृष्टि हो तो शुभ और अवृष्टि हो तो अशुभ कहना चाहिये ।।
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