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बृहत्संहिता • अध्याय 22 • श्लोक 7
मेषाः स्निग्धाः संहताच प्रदक्षिणगतिक्रियाः । तदा स्थान्महती वृष्टिः सर्वसस्याभिवृद्धये ॥
क्रीडा और स्निग्ध विकाररहित, परिवेषसहित रवि-चन्द्रों से गुत गर्भधारण के दिन हों तो सभी धान्यों को सिद्ध करने वाली मूहि होती है।
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