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बृहत्संहिता • अध्याय 22 • श्लोक 5
यदा तु विद्युतः श्रेष्ठाः शुभाशाः प्रत्युपस्थिताः । तदापि सर्वसस्यानां वृद्धिं सूयाद्विचक्षणः ॥
दिन हो तो सभी धान्यों की वृद्धि पण्डितों को कहनी चाहिये। पूति की दृष्टि, जल, बालकों की सुन्दर चेायें, पक्षियों के मधुर शब्द
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