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बृहत्संहिता • अध्याय 22 • श्लोक 3
यदि ताः स्युरेकरूपाः शुभास्ततः सान्तरास्तु न शिवाय । तस्कर भयदाचोक्ताः श्लोकाश्चाप्यत्र वासिष्ठाः ॥
यदि वे चारों गर्भधारण के दिन एक रूप के हों तो शुभ और पुसमान हों तो चोरों को भय देने वाले होते हैं। आगे इसी अर्थ को पुष्ट करने वाले वसिष्ठ के पद्य लिखते हैं।
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