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बृहत्संहिता • अध्याय 22 • श्लोक 1
ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी से चार दिन तक गर्भधारण के दिन होते हैं। इन दिनों में मुखस्मर्स, शुभ (उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में उत्पत्र) बायु और निर्मल मेघयुत आकाश शुभ होते हैं।
ज्यैष्ठसिते ज्येष्ठशुक्लपक्षे आष्टम्याद्याश्चत्वारो ये दिवसास्ते वायुधारणा दिवसाः। कामुर्धारणा येषाम्, ते दिवसा वायुना धार्यन्ते यया तेषां प्रसवो न भवति। ते च दिवसा मृद्धशुभपवनाः शस्ताः। मृदुः सुखसंस्पर्शः। शुभ उदविशवशक्रादिसम्भवः। पवनो वायुः। टप स्निग्धपनस्गगितगगनाथ शस्ता एवं। स्निग्भैररुखैः, पनैर्मेधैः स्थगितं छत्रं गगनमाकाशं पेषु दिवसेषु ।
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