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बृहत्संहिता • अध्याय 21 • श्लोक 18
गर्भाणां पुष्टिकराः सर्वेषामेव योऽत्र तु विशेषः । स्वत्र्तुस्वभावजनितो गर्भविवृद्धयै तमभिधास्ये ॥
मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा से वैशाख के अन्त तक गर्भ की परीक्षा करनी चाहिये। गर्भ की वृद्धि के लिये ऋतु के स्वभाव से उत्पन्न अवशिष्ट लक्षणों को अब आगे कहता हूँ।
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