मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 21 • श्लोक 16
सुरचापमन्द्रगर्जितविद्युत्प्रतिसूर्यका शुभा सन्ध्या । शशिशिवशक्राशास्थाः शान्तरवाः पक्षिमृगसङ्घाः ॥
विद्युत् और प्रतिसूर्य से युक्त पूर्वापरा सन्ध्या, सूर्य के अभिमुख होकर उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में स्थित पक्षी और मृग, नक्षत्रों के उत्तर मार्ग में होकर निर्मल उत्पातरहित ग्रहों का गमन,
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें