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बृहत्संहिता • अध्याय 21 • श्लोक 14
ह्लादिमृदूदक्शिवशक्रदिग्भवो मारुतो वियद्विमलम्। स्निग्धसितबहुलपरिवेषपरिवृतौ हिममयूखाकौं ॥
गर्भ-स्थितिकाल में आह्लादजनक, सुखस्पर्श और उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में उत्पन्न वायु, निर्मल आकाश, स्निग्ध श्वेत परिवेष से व्याप्त चन्द्र और सूर्य, आकाश
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