यदि गर्भकाल में मेध पूर्व दिशा में हो तो प्रसव काल में पश्चिम दिशा में, पश्चिम दिशा में हो तो पूर्व दिशा में, दक्षिण दिशा में हो तो उत्तर दिशा में, उत्तर दिशा में हो तो दक्षिण दिशा में, आग्नेय कोण में हो तो वायव्य कोण में, वायव्य कोण में हो तो आग्नेय कोण में, ईशान कोण में हो तो नैर्ऋत्य कोण में और गर्भकाल में नैऋध्ये कोण में मेघ हो तो प्रसव काल में ईशान कोण में मेघ होता है। इसी तरह वायु का भी दिग्वैपरीत्य समझना चाहिये। जैसे गर्भकाल में पूर्व तरफ की वायु हो तो प्रसव काल में पश्चिम तरफ की वायु होगी- इत्यादि समझना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।