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बृहत्संहिता • अध्याय 21 • श्लोक 12
चैत्रसितपक्षजाताः कृष्णेऽश्वयुजस्य वारिदा गर्भाः । चैत्रासितसम्भूताः कार्तिकशुक्लेऽभिवर्षन्ति ॥
शुक्ल में गर्भ हो तो भाद्र कृष्ण में, फाल्गुन कृष्ण में गर्भ हो तो आश्विन शुक्ल में, चैत्र शुक्त में गर्भ हो तो आश्विन कृष्ण में और चैत्र कृष्ण में गर्म हो तो कार्तिक शुल्क में प्रसव ( वृष्टि) होता है।
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