मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 21 • श्लोक 1
अथ गर्भलक्षणं नामाध्यायो व्याख प्रते। तत्रादावेव प्रयोजनदर्शनार्थमाह- अन्नं जगतः प्राणाः प्रावृकालस्य चान्नमायत्तम् । यस्मादतः परीक्ष्यः प्रावृट्कालः प्रयत्नेन ॥
संसार का प्राण अप है, वह अत्र वर्षा ऋतु के अधीन है; अतः यत्नपूर्वक वर्षा ऋतु की परीक्षा करनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें