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बृहत्संहिता • अध्याय 20 • श्लोक 9
संमौ तु संवर्तसमागमाख्यौ सम्मोहकोशी भयदौ प्रजानाम् । समाजसंज्ञे सुसमा प्रदिष्टा वैरप्रकोपः खलु सत्रिपाते ॥
सम्मोह और कोश में प्रजाओं को भय, समाज में सुसम (पूर्व से पश्चात् अधिक फल) और सत्रिपात में परस्पर द्वेष होता है।
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