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बृहत्संहिता • अध्याय 20 • श्लोक 5
ग्रहसंवर्तसमागमसम्मोहसमाजसत्रिपाताख्याःसा कोशश्चेत्येतेषामभिधास्ये लक्षणं सफलम् ॥
ग्रहसंवर्त, ग्रहसमागम, ग्रहसम्मोह, ग्रहसमाज, ग्रहसत्रिपात और ग्रहकोश-ये छः योग हैं। अब इनका लक्षण और फल कहते हैं।
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