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बृहत्संहिता • अध्याय 20 • श्लोक 3
यस्मिन् खांशे दृश्या ग्रहमाला दिनकरे दिनान्तगते । तत्राऽन्यो भवति नृपः परचक्रोपद्रवश्च महान् ॥
सूर्य के अस्तसमय में जिस देश के आकाशभाग में ग्रहमाला दिखाई दे, वहाँ पर अन्य राजा का आगमन और दूसरे राजा का उपद्रव होता है।
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