चक्रधनुः शृङ्गाटकदण्डपुरप्रासवज्रसंस्थानाः 1
क्षुदवृष्टिकरा लोके समराय च मानवेन्द्राणाम् ॥
दि ग्रहसंस्थान ( ग्रह की आकृति) चक्र, धनु, शृङ्गाटक (त्रिकोण), दण्ड, पुर,
प्रास (आयुधविशेष), कुन्त, वज्र या मध्य में कृश और दोनों तरफ विस्तीर्ण हो तो पृथ्यो
पर सब जगह दुर्भिक्ष, अवृष्टि एवं मनुष्यों में और राजाओं में युद्ध होता है।
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