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बृहत्संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 30
ग्रन्थतश्चार्थतश्चैतत् कृत्स्नं जानति यो द्विजः । अग्रभुक् स भवेत्श्राद्धे पूजितः पंक्तिपावनः ।।
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