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बृहत्संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 19
जगति प्रसारितमिव आलिखितमिव मतौ निषिक्तमिव हृदये । शास्त्रं यस्य सभगणं नादेशा निष्फलाः (निःफलाः) तस्य ॥
जिसने गणित सहित ज्योतिष विज्ञान को स्पष्ट रूप से समझ लिया है, मानो वह उसकी आंखों के सामने दुनिया में फैल गया हो, उसकी बुद्धि में अंकित हो गया हो और उसके दिल में समा गया हो, उसके द्वारा की गई भविष्यवाणियां कभी भी अप्रभावी साबित नहीं होंगी।
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