मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 16
उक्तन् चार्यविष्णुगुप्तेन अपि अर्णवस्य पुरुषः प्रतरन् कदाचिद् आसादयेदनिलवेगवशेन पारम् । न त्वस्य कालपुरुष आख्यमहार्णवस्य गच्छेत् कदाचिदनृषिः मनसापि पारम् ॥
श्रद्धेय विष्णुगुप्त कहते हैं:- समुद्र पार करने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के लिए हवा के बल से दूसरे किनारे तक पहुँचना भी संभव हो सकता है। लेकिन जो व्यक्ति ऋषि नहीं है उसके लिए मानसिक रूप से कालपुरुष अर्थात ज्योतिष के विशाल सागर के दूसरे किनारे तक पहुंचना बिल्कुल भी संभव नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें