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बृहत्संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 13
न प्रतिबद्धं गमयति वक्ति न च प्रश्नमेकमपि पृष्टः । निगदति न च शिष्येभ्यः स कथं शास्त्रार्थविज्ञेयः ॥
जो व्यक्ति शास्त्रों में निहित विचारों को समझने में सक्षम नहीं है (उसी की गलत व्याख्या करता है), न ही किसी भी प्रश्न का उत्तर देने की परवाह करता है, न ही अपने छात्रों को अपने विचार समझाता है, उसे एक ज्योतिषी कैसे कहा जा सकता है जो समझ गया है विज्ञान का सार?
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