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बृहत्संहिता • अध्याय 19 • श्लोक 9
भूपा न सम्यगभिपालनसक्तचित्ताः पित्तोत्थरुक्प्रचुरता भुजगप्रकोपः । एवंविधैरुपहता भवति प्रजेयं संवत्सरेऽ वनिसुतस्य विपन्नसस्या ॥
राजा लोग धर्मपालन में तत्पर नहीं रहते हैं। पैत्तिक रोगों की अधिकता होती है। सपों से लोगों को पीड़ा होती है। इस तरह मङ्गल के स्वामित्व में प्रजागण पीड़ित और धान्यों का नाश होता है।
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