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बृहत्संहिता • अध्याय 19 • श्लोक 6
गोधूमशालियवधान्यवरे खुवाटा भूः पाल्यते नृपतिभिर्नगराकराया। चित्यद्विता क्रतुवरेष्शिविपुष्टनादा संवत्परे शिशिरगोरभिसम्प्रवृत्ते ॥
कमल और कुमुदसेलच और शब्दायमान भ्रमरों से पुत्र स्वर, अधिक दूध देने बाली गी, नेत्रों से सुन्दरी खी (सिन्तर अपने पति को आनन्द देने वाली), साठी, और अার स्थानों से बुड, अग्नि स्थानों से व्याप्त था यह और (पुदि से अन्बिर पृथ्वी राजा में परिचालित होती है।
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