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बृहत्संहिता • अध्याय 19 • श्लोक 5
तोयानि पद्मकुमुदोत्पलवनयतीव फुल्लद्रुमाण्युपवनान्यलिनादितानि । गावः प्रभूतपयसो नथनातिरामा रामा रतैरविरतं रमयन्ति रामान् ॥
विदो जनों के ओक्यक गौरवपुरनियों से दिशाओं को पूर्ण करते हुये मेधों से आच्यादित आकाश, कमल और कुमुदसेलच और शब्दायमान
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