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बृहत्संहिता • अध्याय 19 • श्लोक 16
शालीक्षुमत्यपि धरा धरणीधराभ- धाराधरोज्झितपयः परिपूर्णवप्रा श्रीमत्तारोरुहतताम्युतडागकीर्णा घोषेव भात्यभिनवाभरणोज्ज्वलागी ॥
शुक्र के वर्ष, भारा या दिन में शशाली और इक्षु (खगया) से युत, पर्वत के सभान येथों की गिरे हुये जल से परिपूर्ण बाली सुन्दर कमल और जल से परिपूर्ण
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