कोई
अध्यात्म विद्या (योग) में और कोई आन्वीक्षिकी (सर्वविद्या में विरत होते हैं।
हारयज्ञ, दूत, कवि, चालक, नपुंसक, कि, सेतु (स्थल), जल और पर्वत पर निवास
करने वाले प्रात्र होते हैं तथा पृथ्वी पर औषधियों की अधिकता होती है।
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