सर्वत्र भूर्विरलसस्यपुता वनानि विभक्षयिषुदंष्ट्रिसमावृतानि । नद्या नैव हि पयः प्रचुरं सवन्ति रुग्भेषजानि न तथातिवलान्वितानि ॥
सूर्य से वर्ष, मास या दिन में पृथ्वी पर सब जगह अल्प धान्य, देववश भक्षण को इच्काने वाले ट्रीगण
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