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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 9
दक्षिणदिक्स्थः परुषो वेपथुरप्राप्य सन्निवृत्तोऽणुः । अधिरूढो विकृतो निष्प्रभो विवर्णश्च यः स जितः ॥
बक्षिण दिशा में स्थित, रुक्ष, कम्पायमान, दूसरे ग्रह के पास में नहीं जाकर लौटने बाला, सूक्ष्म विम्ब बाला, अन्य ग्रह से आक्रान्त, विकारयुत, किरणरहित, विवर्ण-इन लक्षणों से युत ग्रह पराजित होते हैं।
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