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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 8
पौरे पौरेण हते पौराः पौरान् नृपान् विनिघ्नन्ति । एवं याव्याक्रन्दा नागरयायिग्रहाश्चैव ॥
यदि पौर ग्रह से पौर ग्रह पीड़ित हो तो पुरवासी राजाओं से पुरवासी राजा का नाश होता है। इसी तरह यायी ग्रह से आक्रन्द ग्रह पीड़ित हो तो यायी मनुष्य से आक्रन्द मनुष्य का और आक्रन्द ग्रह से यायो पोड़ित हो तो आक्रन्द से यायो का नाश होता है तथा नागर ग्रह से यायी पीड़ित हो तो नागर मनुष्य से यायो का और यायी ग्रह से नागर ग्रह पीड़ित हो तो पायी मध्य से नागर मनुष्य का नाश होता है।
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