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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 6
रविराक्रन्दो मध्ये पौरः पूर्वेऽपरे स्थितो यायी। पौरा बुधगुरुरविजा नित्यं शीतांशुराक्रन्दः ॥
सूर्य मध्याह्न समय में आक्रन्द, पूर्व में पौर और पश्चिम में यायी होता है। बुध, बृहस्पति और शनि सदा पौर, चन्द्र आक्रन्द तथा केतु, मंगल, राहु और शुक्र यायी संज्ञक हैं। ये ग्रह पौड़ित हों तो आक्रन्द, यायी और पौरों का नाश करते हैं;
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