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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 5
अंशुविरोधे युद्धानि भूभृतां शस्त्ररुक्क्षुदवमर्दाः । युद्धे चाप्यपसव्ये भवन्ति युद्धानि भूपानाम् ॥
में परस्पर युद्ध, शस्र, रोग और क्षुधाओं से मनुष्य को अत्यन्त पीड़ा होती है तथा अपसव्ययुद्ध (कोई ग्रह किसी ग्रह के दक्षिण पार्श्व से आगे होकर वाम पार्श्वगत हो तो) राजाओं में परस्पर युद्ध होता है।
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