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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 3
आसन्नक्रमयोगाद् युद्धं चतुष्यकार भेदोल्लेखांशुमर्दनासव्यैः । पराशराद्यैर्मुनिभिरुक्तम् ॥
विशेष-अपःस्थित विम्प से ऊध्यस्थित चिम्ब के आच्छादित होने से भेद, एक विम्वपरिधि से दूसरे को विम्बपरिधि का स्पर्श करे तो उल्लेख, आसप्रस्थित दोनों ग्रहों के परस्पर किरण का संयोग होने से अंशुमर्दन और ठोक दक्षिणोत्तर में स्थित होने से अपगव्य नामक ग्रहयुद्ध होता है।
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