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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 27
फलं तु वाच्यं ग्रहभक्तितोऽन्य- द्यथा तथा घ्नन्ति हताः स्वभक्तीः ॥
मङ्गल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि के ये विशेष फल कहे गये हैं, अवशिष्ट फल ग्रह की भक्ति से कहना चाहिये। जिस तरह व्यक्त या अव्यक्त रूप से ग्रह पीड़ित होते हैं, उसी प्रकार व्यक्त या अव्यक्त रूप से अपनी भक्ति का भी नाश करते हैं।
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