शुक्रे बृहस्पतिजिते यायी श्रेष्ठो विनाशमुपयाति ब्रह्मक्षत्रविरोधः सलिलं च न नवा
अथ शुक्रस्य सर्वग्रहविजितस्य फलमाह-
न वासवस्त्यजति ॥
यदि बृहस्पति से शुक्र पराजित हो तो यायी (नायक) और प्रधान जनों का नाश, ग्राह्मण और क्षत्रियों में परस्पर विरोध, अवृष्टि
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