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बृहत्संहिता • अध्याय 17 • श्लोक 20
शशितनयेनापि जिते बृहस्पती म्लेच्छसत्यशखभृतः । उपयान्ति मध्यदेशश्च संक्षयं यच्च भक्तिफलम् ॥
मध्य देश का नाश होता है तथा गुरुभक्ति के फल (ग्रहभक्तियोगाध्यायोक्त गुरुभक्तिफल) का भी नाश होता है
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